अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन शास्त्रि-परिषद् दिगम्बर जैन परम्परा में देव-शास्त्र-गुरु, जैनधर्म, दर्शन और संस्कृति के संरक्षण तथा दिगम्बर जैन आर्षमार्गीय साहित्य के प्रकाशन एवं प्रचार-प्रसार में समर्पित आर्ष परम्परा के अनुयायी विद्वानों की एक जागरुक संस्था है, जिसे अद्यावधि अनेक मुनिराजों का आशीर्वाद प्राप्त है।
पुरस्कार की प्रथम संयोजना सन् 1925 जयपुर अधिवेशन में की गई, जिसमें श्री पं. मक्खनलालजी शास्त्री और श्री पं. खूबचन्द्र शास्त्री को विद्यावारिधि उपाधि से सम्मानित कर विद्वानों के सम्मान की श्रृंखला को प्रारम्भ किया गया था। प्रतिभावान, कुशल लेखक, अनुवादक, प्रखरवक्ता, शोधकर्त्ता विद्वानों को परिषद् पुरस्कार प्रदान कर उनके कृतित्व को बहुमान देती है। जिससे युवाओं को प्रेरणा मिलती है एवं उनका गौरव बढ़ता है। शास्त्रि - परिषद् ने समय - समय पर आचार्यों, मुनिराजों, आर्यिका माताओं एवं विद्वानों के अभिनंदन ग्रन्थ एवं स्मृति ग्रन्थों का प्रकाशन किया। यथा - आचार्य महावीर कीर्ति स्मृति ग्रन्थ 1978, आचार्य धर्मसागर स्मृति ग्रन्थ, आचार्य वीरसागर स्मृति ग्रन्थ 1990, गणिनी आर्यिका ज्ञानमती माताजी अभिनंदन ग्रन्थ 1992, आचार्य शान्तिसागर छाणी स्मृति ग्रन्थ 1998, उपाध्याय ज्ञानसागर अभिवंदना पुष्प, विद्वत् अभिनंदन ग्रन्थ 1976, पं. बाबूलाल जमादार अभिनंदन ग्रन्थ 1981, पं. सुनहरीलाल अभिनंदन ग्रन्थ 1983, पं. लालबहादुर शास्त्री अभिनंदन ग्रन्थ 1986, पं. रतनचंद मुख्तार व्यत्कित्व एवं कृतित्व 1989, पं. मक्खनलाल शास्त्री अभिनंदन ग्रन्थ, डॉ. महेन्द्रकुमार स्मृति ग्रन्थ 1996, डॉ. कस्तूरचंद कासलीवाल अभिनंदन ग्रन्थ 1998, पं. गुलाबचंद्र पुष्प अभिनंदन ग्रन्थ 2001, प्राचार्य नरेन्द्र प्रकाश अभिनंदन ग्रन्थ 2004, डॉ. शेखरचंद्र जैन अभिनंदन ग्रन्थ 2004 आदि।
परिषद् के यशस्वी विद्वानों ने दीक्षा ग्रहण कर परिषद् को गौरवान्वित किया है -
1. पं. नंदलाल जैन, मुम्बई - मुनि सुधर्मसागर जी
2. डॉ. माणिक चन्द जैन, सागर (मप्र)
दीक्षा गुरु - मुनि श्री सरलसागर जी।
वर्तमान नाम - मुनि श्री अनन्तानन्तसागर जी