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श्री चांदमल जैन पांड्या स्मृति

(मरूप्रदेश) राजस्थान लालगढ़ कस्बे में स्वनाम -

धन्य श्री मूलचंद जी सरावगी के घर मातु श्री जंवरीबाई की कुक्षि से ३ जनवरी १९१२ को सेठ चांदमल जी का जन्म हुआ था | श्री सरावगी जी का बचपन तथा छात्र काल कलकत्ता में बीता |

सुजानगढ़ में एक सार्वजनिक स्कूल की स्थापना की है तथा गुवाहाटी में एक मोंटेसरी स्कूल भी अपनी धर्मपत्नी के नाम से स्थापित किया है |

आप श्री 1008 भगवान महावीर स्वामी के 2500 निर्माण महोत्सव के कार्यक्रम की प्रगति के लिए विशेष रूप से क्रियाशील रहे |

आप इस संबंध में श्रीमती इंदिरा गांधी की अध्यक्षता में गठित राष्ट्रीय समिति के भी सदस्य तथा उक्त समिति की कार्य समिति के भी सदस्यथे |

इसी भांति आसाम सरकार द्वारा गठित ऑल आसाम 2500 वीं निर्वाण समिति के भी सदस्य रहे ऑलइंडिया दिगंबर जैन भगवान महावीर 2500 वीं निर्वाण महोत्सव सोसायटी दिल्ली के आप बैंकिंग प्रेसिडेंट थे |

श्री सरावगी जी मंदिर के निर्माण' मानस्तंभ की स्थापना तथा धार्मिक अनुष्ठानों में श्रद्धापूर्वक भाग लेते थे | गोहाटी, मरसलगंज तथा शांति वीरनगर श्री महावीर जी के संपन्न पंचकल्याणक प्रतिष्ठा में आपका मुक्तहस्तसे सहयोग सर्वविदित है | आपका चंचलालक्ष्मी का सदुपयोग विभिन्नतीर्थों पर लाखों रुपए दान देकर किया है |

श्री सरावगी जी ने सुजानगढ़ में मानस्तंभ का निर्माण कराया तथा शांति वीरनगर श्री महावीर जी मेंऊंचे संगमरमर के मानस्तंभ का निर्माण कार्य आपके द्वारा हुआ | श्री सरावगी जी तीन बार संपूर्ण भारत के जैन तीर्थों की वंदना कर चुके और सन 66 से प्रतिवर्ष पर्यूषण पर्व तथा अष्टाहीका पर्व में उपवास करते थे |

सरावगी जी का विवाह 1.5.1930 और श्रीमती भंवरी देवी के साथ संपन्न हुआ जो स्वयं सरलस्वभाव की धर्मपरायण विदुषी महिलारत्न है और अपने अतिथियों को स्वजनों से भी अधिक मान सत्कार देती है | सराओगी जी के सर्व श्री गणपतरायजी, रतनलाल जीव भागचंद जी सुयोग्य पुत्र है, तथा गिनिया देवी, सुशीला देवी किरण देवी विमला देवी तथा सरला देवी नामक 5 पुत्रियांधर्मप्राण, सुसंस्कृत और संपन्न परिवार में विवाहिता है |

पुरस्कार प्रदाता - श्रीमान गणपत पांड्या जी जैन

श्री चांदमल सरावगी एंड एंड संस फैंसी बाजार गुवाहाटी, असम

पुरस्कार राशि - 1100/- प्रशस्ति पत्र शाल एवं श्रीफल

पुरस्कार अवधि- प्रतिवर्ष